अशोकनगर को विश्व पटल पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला आनंदपुर ट्रस्ट पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे के कारण खासा चर्चा में है। 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री ट्रस्ट के प्रमुख और पादशाही की गद्दी पर विराजमान गुरु से मुलाक़ात कर चर्चा करेंगे।
पीएम का यह दौरा पूरी तरह से धार्मिक है। यहां सत्संग सभा को पहले गुरु फिर पीएम मोदी संबोधित करेंगे। ऐसे में आनंदपुर को लेकर जन चर्चा है कि ऐसा क्या है वहां कि पीएम मोदी पहुंच रहे हैं। दरअसल, अद्वैत मठ को मानने वाले समूचे विश्व में एक हजार जबकि भारत में करीब 36 ट्रस्ट हैं।
आनंदपुर ट्रस्ट में पादशाही चुनने की प्रक्रिया है गद्दी पर विराजमान गुरु शरीर छोड़ने के पहले अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करते हैं। वर्तमान समय में आनंदपुर ट्रस्ट में छठवें पादशाही के रूप में आनंदपुर में ही जन्मे स्वामी विचार पूर्णानंद हैं। आनन्दपुरधाम की स्थापना 1939 में प्रथम पादशाही अद्वैत आनन्द ने की थी। यहां अधिकांश लोग पहचान पत्र में पिता-पति की जगह गुरु का नाम श्रद्धापूर्वक लिखते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरूजी के दर्शन के बाद में आश्रम में पहुंचे और गोशाला जाएंगे। यह धाम अनोखी परंपरा के साथ ही समाजसेवा के लिए जाना जाता है। मप्र में ट्रस्ट के शिवपुरी, ग्वालियर और इंदौर में सत्संग केंद्र हैं। वहीं पुणे, जम्मू, मुंबई, बेंगलूरु, गोंड यूपी, सतारा, दिल्ली, धौलपुर के अलावा विदेशों में भी केंद्र हैं।







