मिट्टी में हो रही धातुओं की लगातार मात्रा कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन गयी है। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 15 फीसदी खेती लायक जमीन भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुकी है। इसका सीधा प्रभाव करीब 1.4 अरब उन लोगों पर पड़ रहा है जिनका ऐसे क्षेत्रों में अधिक एक्पोजर है। ऐसे कई क्षेत्र है, जिनकी मिट्टी में आर्सेनिक, कैडियम,कोबाल्ट,क्रोमियम, कॉपर,निकल, लेड जैसी खतरनाक धातुओं की मात्रा होती है जो जमीन के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। ये धातुंए भोजन, पानी और हवा के जरिए इंसानों और जलीय जीवों तक पहुंच रही है इससे लम्बे समय में इनके स्वास्थ्य के लिए खतरा मंडरा रहा है।
खेती में हो रहा है कीटनाशक का इस्तेमाल
जमीन में भारी धातुओं के पहुंचने के सोर्सेज खनन,औद्योगिक उत्सर्जन,कचरे का अनियोजित निस्तारण के अलावा खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का बेतहाशा प्रयोग हो रहा है। खासकर फास्फेटिक उर्वरकों का. इसका एक मात्र हल है जैविक या प्राकृतिक खेती। ऐसी खेती जो विष रहित हो। वही पर्यावरण के अनुकूल हो, साथ ही अप्रत्याशित मौसम अधिक गर्मी, सूखा और जलजमाव और पानी के प्रति भी सहनशील। यही वजह है कि योगी सरकार लगातार इस जैविक एवं प्राकृतिक खेती और मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहन दे रही है। यह जन, जमीन और जल के अनुकूल है।
5,000 रुपये के मानदेय पर कृषि सखियों की नियुक्ति
बुंदेलखंड और गंगा के तटवर्ती इलाकों के बाद गंगा की सहयोगी नदियों के दोनों किनारों पर भी ऐसी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस खेती के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए प्रति माह 5,000 रुपये के मानदेय पर कृषि सखियों की नियुक्ति की जाएगी। इनको संबंधित जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के एक्सपर्ट प्रशिक्षण देंगे। वही प्राकृतिक खेती के लिए हर जिले में दो बायो इनपुट रिसर्च सेंटर भी खुलेंगे। वही सरकार की मंशा 282 ब्लाकों, 2144 ग्राम पंचायतों की करीब 2.5 लाख किसानों को इससे जोड़ने की है। इससे खेती क्लस्टर में होगी। हर क्लस्टर 50 हेक्टेयर का होगा। वही सरकार इस योजना पर अगले दो वर्ष में करीब 2.50 अरब रुपए खर्च करेगी।
बुंदेलखंड में प्राकृतिक खेती को मिल रही है गति
उत्तरप्रदेश में योगी सरकार में गो आधारित प्राकृतिक खेती मिशन चला रही है। वही किसान गोबर व गोमूत्र से ही खाद और कीटनाशक (जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत) जैसे मिश्रण बनाने के तरीके सिखा रहे हैं। इसे बनाकर उनका खेत और फसल में प्रयोग करें, इसके लिए उनको प्रशिक्षित किया गया है। यह कार्यक्रम अभी जारी है। वही प्राकृतिक खेती मिशन के पहले और दूसरे चरण के लिए सरकार ने 13.16 करोड़ रुपए जारी भी किए हैं। अब तक 470 क्लस्टर गठित कर 21934 किसानों को इससे जोड़ा गया है। वही हर ग्राम पंचायत में 50 हेक्टेयर का एक क्लस्टर बनाया जा रहा है। इससे किसानों को दो हेक्टेयर तक के लिए वित्तीय सहायता भी दी जा रही है और फार्मर्स फील्ड स्कूल के 2535 सत्र आयोजित किए गए हैं।
पशुपालकों को लगातार प्रोत्साहन दे सरकार
पशुपालक गोवंश का पालन कर रहे है इसके लिए सरकार उनको लगातार प्रोत्साहन कर रही है इसके लिए 25 प्रजाति देशी नस्ल की गया के संरक्षण, संवर्धन एवं दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार नायब की पहल की है इसके लिए शुरू की जाने वाली ‘नंदनी कृषक समृद्धि योजना’ के तहत बैंकों के लोन पर सरकार पशुपालकों को 50% सब्सिडी देगी। इसी क्रम में सरकार ने अमृत धारा योजना भी लागू की है। इसके तहत दो से 10 गाय पालने पर सरकार बैंकों के जरिये 10 लाख रुपये तक अनुदानित ऋण आसान शर्तों पर मुहैया करवा रही है। इस योजना के तहत तीन लाख रुपये तक अनुदान के लिए किसी गारंटर की भी जरूरत नहीं होगी।







