उत्तराखंड बनेगा Uttarakhand Horticulture Hub, किसान चौपाल में उठीं जमीनी मुद्दों की गूंज

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“मैं किसान का दर्द जानता हूं”: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

डोईवाला (देहरादून): Uttarakhand Horticulture Hub: खेती के मैदान में बिछी खाट पर बैठे एक केंद्रीय मंत्री। सामने बैठे सैकड़ों किसान, आंखों में उम्मीदें और दिलों में सवाल। यह कोई आम राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित किसान चौपाल थी, जिसने उत्तराखंड की कृषि नीति को नई दिशा देने का संदेश दिया।

शुक्रवार को डोईवाला ब्लॉक के पाववाला सौड़ा गांव में पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के साथ आत्मीय संवाद किया। इस संवाद में न कोई मंच था, न ही औपचारिकता—बस धरती की खुशबू, मेहनतकश किसान और सरकार की संवेदनशीलता का एक सजीव दृश्य।

उत्तराखंड को बनाया जाएगा Uttarakhand Horticulture Hub
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने एक अहम घोषणा की—”उत्तराखंड को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ‘Uttarakhand Horticulture Hub’ के रूप में विकसित करेंगी।”
उन्होंने कहा कि यहां के फल, सब्जियां और अनाज वैश्विक स्तर की गुणवत्ता रखते हैं और इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना अब प्राथमिकता होगी।

“यह भूमि सिर्फ धार्मिक दृष्टि से पावन नहीं, बल्कि कृषि की दृष्टि से भी असीम संभावनाओं वाली है,” मंत्री ने कहा। “मैं किसान परिवार से हूं, इसलिए दर्द समझता हूं” किसान चौपाल में जब एक बुजुर्ग किसान ने फसल बीमा योजना में आ रही दिक्कत बताई, तो मंत्री चौहान ने बिना देर किए अधिकारियों को निर्देश दिए कि समाधान एक निश्चित समय सीमा में हो। “मैं स्वयं किसान परिवार से हूं, किसान का दर्द जानता हूं। योजना कितनी कारगर है, यह जानने का सबसे अच्छा तरीका है सीधे खेत में आना। यही वजह है कि आज मैं खाट पर बैठकर किसानों से संवाद कर रहा हूं,” – शिवराज सिंह चौहान

बीज से बाजार तक—किसानों की आवाज बुलंद
इस चौपाल में लीची, बासमती, कटहल और सब्ज़ी उत्पादकों ने खुले मन से अपने अनुभव साझा किए। बीज की गुणवत्ता, सिंचाई साधनों की कमी, कृषि उत्पादों का सही मूल्य और फसल बीमा जैसी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उत्तराखंड सरकार के कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी और विभागीय अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने सभी सुझावों और शिकायतों को गंभीरता से नोट किया।

कृषि में नवाचार और परंपरा का संतुलन
मंत्री चौहान ने कहा कि भविष्य की खेती को लाभकारी बनाने के लिए प्राकृतिक खेती, तकनीकी नवाचार, और जल संरक्षण पर विशेष बल दिया जाएगा। “अब वक्त है कि परंपरा को विज्ञान से जोड़ा जाए। जब किसान के खेत में तकनीक पहुंचेगी, तभी उसकी थाली में खुशहाली आएगी।”

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण
चौपाल के समापन पर मंत्री ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि खेती और हरियाली का रिश्ता केवल उत्पादन तक सीमित नहीं, यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है।

चौपाल के बाद श्री चौहान ने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके पश्चात वह गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में एक और किसान संवाद कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।यह केवल एक कार्यक्रम नहीं था, यह एक संकेत है उस बदलाव का, जहां सरकार और किसान एक मंच पर खड़े होकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं।
Uttarakhand Horticulture Hub सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि एक आंदोलन बनने जा रहा है – और इसकी शुरुआत पाववाला सौड़ा के उस खेत से हो चुकी है।

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Author: Firenib

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