भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हिंद-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच (FIPIC) के विदेश मंत्रियों की एक बैठक की मेजबानी की है। इस बैठक में स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और दक्षता विकास पर जोर देते हुए “जन-केंद्रित” एजेंडे पर व्यापक चर्चा की गयी है यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित की गयी है इससे पहले विदेश मंत्री ने दुनियाभर में अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकों में शामिल हुए है इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक संघर्षों सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कहा?
एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “न्यूयॉर्क में एफआईपीआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करके प्रसन्नता हुई। यह जानकर खुशी हुई कि एफआईपीआईसी-तीन शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 12-सूत्रीय कार्ययोजना में आगे बढ़े है। उन्होंने कहा, “भारत और प्रशांत द्वीपीय देश विकास साझेदार हैं। हमारा एजेंडा जन-केंद्रित है और स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण पर केंद्रित है।
FIPIC के बारे में जानें
आपको बता दे, हाल ही में भारत ने विश्व राजनीति में अपने दायरे को मजबूत करने के लिए बेहतरीन कदम उठाए है इन्ही पहलों में से FIPIC भी एक वैश्विक मंच है जो भारत और प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों को आपसी सहयोग, विकास और साझेदारी के मार्ग एकजुट करता है, इसके साथ ही छोटे छोटे द्वीपीय देश, जिनका रणनीतिक और भौगोलिक महत्व बहुत अधिक है, भारत के लिए नए अवसरों और साझेदारी के द्वार खोलते हैं।
FIPIC की शुरुआत?
FIPIC की शुरुआत वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी, इसका पहला शिखर सम्मेलन फिजी में आयोजित किया गया है जिसमे भारत और प्रशांत द्वीपों के बीच आपसी सहयोग पर जोर दिया गया था। इसके साथ ही 14 प्रशांत द्वीपीय देश शामिल हैं, जैसे – फिजी, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप, समोआ, टोंगा, वानुआतु जैसे देश शामिल है। इसका उद्देश्य भारत और द्वीपीय देशों के बीच राजनीतिक सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी करना है।







