यूपी में वृद्धावस्था पेंशन लेने वालो के लिए बेहद अच्छी खबर आ गयी है। अब उन्हें वेरिफिकेशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। वही बुजुर्गों को जीवन प्रमाण पत्र अब मोबाइल से ही मिल जाएगा। वही उत्तर प्रदेश का समाज कल्याण विभाग बुजुर्गों की परेशानी का हल निकालते हुए जीवन प्रमाण मोबाइल एप लांच करने जा रही है। अभी तक यह एप सिर्फ पेंशनधारकों के लिए ही इस्तेमाल किया जाता आ रहा है।
यूपी के समाज कल्याण मंत्री आसिम अरुण ने TOI से बातचीत में कहा है कि यूपी वृद्धावस्था पेंशन के लिए साल में एक बार उम्र का सत्यापन होना जरूरी होता है। इसमें कई तरह की खामियां पाई जाती हैं। इस वजह से सिस्टम में गड़बडी की भी गुंजाइश बनी रहती है। कई बार पात्र बुजुर्गों को जानबूझकर छोड़ दिया जाता है या अपात्र लोगों की भी पेंशन जारी रहती है।
बायोमैट्रिक से होगा वैरिफिकेशन
यूपी के मंत्री आसिम अरुण ने बताया कि उन्होंने वेरिफिकेशन के लिए बायोमैट्रिक के इस्तेमाल का प्रस्ताव दिया है। इस काम को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और मोबाइल एप के जरिए किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री के सामने इसे लेकर प्रेसेंटेशन दी गई है और हम कैबिनेट के सामने रखने के लिए प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहे हैं। इससे सिस्टम में न सिर्फ पारदर्शिता आएगी बल्कि वृद्धा पेंशन के लाभार्थियों के लिए भी चीजें आसान हो जाएंगी।
बुजुर्गो को नहीं करना पड़ेगा आवेदन
यूपी में बुजुर्गो को पेंशन शुरू करने के लिए अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ती है। वही इसके लिए सरकार द्वारा की तरह के इंतजाम कर लिए गए है। वही यूपी सरकार ने हाल ही में प्रस्ताव पास किया है, जिसके मुताबिक समाज कल्याण विभाग नए लाभार्थियों की जानकारी फैमिली आईडी से ही ले लेंगे। इसका मतलब जैसे ही कोई पात्र बुजुर्ग 60 साल के होंगे, उनके खाते में अपने आप ही पेंशन आना शुरू हो जाएगी। हालांकि इसके लिए एक बार पात्र लाभार्थी की सहमति जरूर ली जाएगी। यह काम मोबाइल एप के जरिए ही होगा।
5 जिलों में शुरू किया जाएगा यह कार्यक्रम
इस योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 5 जिलों में शुरू की जाएगी। यह स्कीम काम कर रही है या नहीं, इसके लिए 4 से 5 महीने तक इसे चलाकर देखा जाएगा। जरूरत पड़ी तो इसमें कुछ बदलाव भी किए जाएंगे। वही साल के अंत में इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा। यही नहीं दूसरे विभाग भी पेंशन स्कीम के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
सत्यापन
आपको बता दे, मोबाइल एप के जरिए हर साल में एक बार वेरिफिकेशन किया जाएगा। वही बुजुर्गो को खुद को जीवित रखने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने या सरकारी बाबुओं के ‘रहम’ पर निर्भर नहीं रहना होगा। वही यह काम मोबाइल एप से हो जाएगा। वही ओटीपी के जरिए यह होगा, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना भी कम हो जाएगी।







