Shimla Property Tax: हिमाचल प्रदेश के शिमला नगर निगम ने अपने शहर के 30 हजार भवन मालिकों को झटका दिया है। इस बढ़ोतरी के माध्यम से प्रउद्योगिकी की राजधानी शहर में रहना महंगा हो जाएगा। नगर निगम ने पेयजल और कूड़ा शुल्क के बाद अब प्रॉपर्टी टैक्स में 4% की बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी वित्तीय वर्ष से ही लागू होगी, लेकिन इसकी वसूली अगले साल जारी होने वाले टैक्स बिलों के माध्यम से होगी।

नगर निगम की मासिक बैठक में यह प्रस्ताव चर्चा के लिए रखा गया था, और इसे भाजपा पार्षदों के विरोध के बावजूद पारित कर दिया गया। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रदेश की विकास दर के हिसाब से टैक्स में बढ़ोतरी करने की आवश्यकता है। इस नई व्यवस्था को देशभर के सभी शहरी निकायों पर लागू किया जाएगा। शिमला नगर निगम अब प्रॉपर्टी टैक्स में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी कर रहा है ताकि वे केंद्रीय अनुदान प्राप्त कर सकें। पिछली बार प्रस्ताव का विरोध करने वाले शहरी विधायक हरीश जनारथा ने इस बार विरोध नहीं किया, और उन्होंने सदन को इस पर फैसला लेने के लिए प्रेरित किया।

यह नई बढ़ोतरी शिमला नगर निगम के भवन मालिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इससे शहर में रहने वालों को आर्थिक दबाव महसूस होगा। वहाँ के निवासियों को नये अदालती पत्रों की तलाश में भी जाना पड़ सकता है। इस बढ़ोतरी से शिमला नगर निगम को केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा और उन्हें अपने विकास कार्यों के लिए अनुदान प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त धन प्रदान करना होगा. इस बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप, शिमला नगर निगम के भवन मालिकों को अधिक पैसे देने होंगे और वे इससे प्रभावित होंगे। इससे शहर में रहना महंगा हो जाएगा और नागरिकों को अधिक व्यय करना पड़ेगा। इसके अलावा, नगर निगम के प्राधिकारियों को नये टैक्स बिलों को तैयार करने के लिए अतिरिक्त काम करना पड़ेगा।

यह नई बढ़ोतरी शिमला नगर निगम के वित्तीय स्थिति में सुधार लाने का प्रयास है, लेकिन इसका प्रभाव नगर निगम के निवासियों पर असर डालेगा। वे इसे स्वीकार करने में कठिनाई महसूस करेंगे और इसके लिए व्यापारियों और निवासियों को और अधिक आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। इससे यह साफ है कि शिमला में रहना अब पहले से अधिक महंगा हो गया है।
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