गर्मियों के सीजन में भिंडी की आवक बढ़ आती है, यह एक ऐसी सभी है जो हर किसी की फेवरेट होती है। लोग दाल, चावल से लेकर पराठे के साथ में इसका सेवन करते है भिंडी का इस्तेमाल न केवल खाने में किया जाता है बल्कि इसकी जड़ो और तनों को गुड़ और खांड को साफ करने में भी किया जाता है इसके फलों और रेशेदार डंठलों का उपयोग कागज और कपड़ा उद्योग में भी होता है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि गर्मी के मौसम में इसकी खेती में किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।
तापमान
भिंडी गर्मियों के सीजन में आने वाली सब्जी है इसकी खेती के लिए 20 डिग्री तापमान काफी अच्छा होता है तभी इसमें अंकुरण सही से हो पता है इस बात का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है की जब दिन का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है तो इसके फूल झड़ने लगते हैं. गर्मी में भिंडी की फसल करीब 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है। इसके साथ बारिश में यह आकड़ा 100 क़्वींटल तक पहुंच जाता है लेकिन अच्छी उप के लिए आपको मिट्टी की निराई गुड़ाई का खास ख्याल रखना चाहिए।
बुवाई में इन बातों का रखें ख्याल
गर्मियों के मौसम में यदि आप भिंडी की बुवाई करते है तो कतार से कतार की दुरी में 30 सेमी का अंतर रखे। वही पौधे से पौधे की दूरि में 12-15 सेमी का अंतर रखे। वही कतारों की दूरी 45-60 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 30-45 सेमी होनी चाहिए। वहीं गर्मी में 5-6 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। जबकि बारिश में अगर जरूरत लगे तो ही सिंचाई करें। वही खरपतवार नियंत्रण के लिए क्यारियों की निराई-गुड़ाई करते रहें।
ऐसे करे खेत तैयार
भिंडी की अच्छी फसल के लिए भुरभुरी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है, जिसमें जैविक खाद और पोषक तत्व पर्याप्त होनी चाहिए। वही इसके खेत को तीन से चार बार जोतकर समतल कर लेना चाहिए। इसके साथ ही गर्मी के मौसम में सिंचाई की सुविधा के अनुसार खेत को उचित आकार की क्यारियों में बांट लेना सही रहता है। खेती से पहले 120-200 क्विंटल गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर मिला लेवे। इसके अलावा, 50 किलो नाइट्रोजन, 50 किलो फास्फोरस और 50 किलो पोटाश भी प्रति हेक्टेयर मिला लेना चाहिए। वहीं बुवाई के एक महीने बाद 50 किलो नाइट्रोजन अतिरिक्त मिलाना ठीक रहता है।







