
Mumbai: मुंबई में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिती की तीन दिवसीय बैठक शुक्रवार को समाप्त हो गई। इस बैठक के दौरान जानकारी मिली कि जनता को अब महंगाई से राहत नहीं मिलने कोई उम्मीद नहीं है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि खाद्य तेलों की कीमतों में आगे और कमी आने की कोई उम्मीद नहीं है, लेकिन चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई के 6.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। जहाँ वर्ष 2022 तक लगातार छठे महीने में खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक के निर्धारित लक्ष्य छह प्रतिशत तक से ऊपर जा रही है। उन्होंने कहा नीतिगत दरों में की बढ़ोतरी से मध्यावधि में चार प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है और अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसके 5.0 प्रतिशत पर लाने का अनुमान लगाया गया है।
गवर्नर ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में तीन अगस्त, 2022 तक 13.3 अरब डॉलर पोर्टफोलियो निवेशक निकाले हैं। बैंक ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर यथावत रखा है। पहली तिमाही में 16.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.1 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.0 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई की मार पड़ रही है और महंगाई बढऩे के वैश्विक कारक भी शामिल हैं। बावजूद इसके भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी ने बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति समिति का अब समायोजन वाले रूख को वापस लेने की ओर बढऩे का निर्णय लिया गया है।
0.50 प्रतिशत बढ़ा रेपो रेट
रेपो दर 0.50 प्रतिशत बढक़ार 5.40 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है, जबकि रिवर्स रेपो दर 0.50 प्रतिशत बढक़र 5.15 प्रतिशत पर नीतिगत दरों में बढ़ोतरी के साथ ही एमएसएफ बढक़र 5.65 प्रतिशत पर, बैंक दर भी 5.65 प्रतिशत पर और एसडीएफ दर 5.15 प्रतिशत पर रखी है। इसका असर अब होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन की ईमआई पर दिखने वाला है।








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