अरुणाचल प्रदेश में सुबनसिरी जिले में, चीन की सीमा के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में 2,220 मेगावाट के ओजू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है। यह भारत के सबसे बड़े रन ऑफ रिवर हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में से एक है इसकी अनुमानित लागत लगभग 25000 करोड़ रूपये है।
भारत का तीसरा सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट
ओजू प्रोजेक्ट सुबनसिरी नदी पर प्रस्तावित कई बांधों में सबसे बड़ा है और इसे विकसित करने की योजना पिछले करीब 20 सालों से चल रही है। इस प्रोजेक्ट में 100 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रैविटी डैम, 14 किलोमीटर लंबा हेडरेस टनल और भूमिगत पावरहाउस कॉम्प्लेक्स को शामिल किया गया है। यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है, जिसे पर्यावरण मंजूरी मिली है, इससे पहले अरुणाचल प्रदेश के 3,087 मेगावाट और 2,880 मेगावाट के डिबांग प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी।
इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देते समय सुरक्षा और पर्यावरण का खास ध्यान रखा गया है वही समिति का मानना है की प्रोजेक्ट डिज़ाइन में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की संभावना शामिल हो, रीयल-टाइम अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित किया जाए और स्थानीय समुदायों के लिए तैयारी और प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित किए जाएं। इसके अलावा, प्रोजेक्ट चालू होने के 5 साल बाद पर्यावरण प्रभाव का अध्ययन करना भी अनिवार्य किया गया है।
5 साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट
ओजू प्रोजेक्ट को पूरा होने में कम से कम 5 साल का समय लग सकता है वही प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद न केवल ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।







