केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर राज्यों के सीमावर्ती जिलों के किसानों की खेती एवं उनके लिए उपलब्ध खाद- बीज और बाकी संसाधनों के बारे में समीक्षा बैठक की है। इस बैठक में शिवराज सिंह ने इन जिलों के किसानों के कृषि संबंधी कार्यों की समुचित व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वही आपको बता दे, यह 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के हालात हैं।
जवान और किसान दोनों लड़ रहे
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी जो देश की परिस्थितियां हैं, उनमें सीमा पर जवान भी लड़ रहा है और सीमा का किसान भी लड़ रहा है। हमारे किसान भाई बहन देश और देश के जवान के लिए अपने खेतों में तैयार हैं। वही कई किसान भाईयों को सुरक्षा के कारणों से, उनकी जहां खेती है, वहां से थोड़ा दूर रखा गया है ताकि उनकी जिंदगी सुरक्षित रहे। उनका कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र के हर राज्य के किसान चाहें वो पंजाब के हों, राजस्थान के हों, जम्मू-कश्मीर के हों, बाकी प्रांतों के हों, उनकी खेती हम कैसे सुरक्षित रख पाएं, यह सरकार की जिम्मेदारी है।
खरीफ की बुवाई ठीक
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने आला अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभी की परिस्थितियों में अगर सीमावर्ती जिलों के किसान आज खेती नहीं कर पा रहे हैं तो कल उन्हें किस तरह के सीड्स की जरूरत होगी, विशेषकर खरीफ की फसल के लिए, प्लांटिंग मटेरियल क्या चाहिए, ऐसी सारी जरूरतों को एक बार आकलन कर लिया जाए। उसके बाद हम इन सभी चीजों को उपलब्ध कराएंगे ताकि किसान खरीफ की बुवाई ठीक से कर सकें।
खेती और बीजों की उपलब्धता
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में खेती और बीजों की उपलब्धता पर विचार किया गया। वही कृषि मंत्री ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में कुल कितनी जमीन है, कितने किसान प्रभावित हैं, कौन-कौन सी फसलें होती हैं और उन्हें किन सुविधाओं की जरूरत है, इसका आकलन राज्य सरकारों के साथ मिलकर किया जाएगा।
बॉर्डर के गांवों की हो पहचान
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि बॉर्डर के 10–15 किलोमीटर की पट्टी में आने वाले गांवों की पहचान की जाए और पता लगाया जा रहा है कि वहां कितनी खेती योग्य जमीन है, वही इन गाँवो में खरीफ की फसलें उगाई जाती है। इसका डेटा पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश से जुटाया जा रहा है। इसके जिन किसानों की खेतों तक पहुंच नहीं पाई है उनकी मदद कैसे की जाए, इसका भी प्लान राज्य सरकार के साथ मिलकर बनाएं। वही कृषि मंत्री के अनुसार खरीफ की बुवाई प्रभावित न हो, इसके लिए किसानों से संपर्क कर उनकी सहायता की जाएगी







