केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों से की बातचीत, प्राकृतिक खेती पर दिया जोर

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शिवराज सिंह ने कहा कि केवीके कृषि में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, शिवराज सिंह ने कहा कि खरीफ की बुआई से पहले सभी केवीके और आईसीएआर, राज्य सरकारों के साथ मिलकर किसान जागरुकता अभियान चलाएं। शिवराज सिंह ने प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और किसानों के हितों के मद्देनजर उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले केवीके को पुरस्कृत किए जाने के प्रस्ताव पर भी विचार हुआ।

कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुख शामिल

इस संवाद में देशभर के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुखों के साथ ही कृषि वैज्ञानिक शामिल हुए, जिनमें से कुछ ने केवीके की उपलब्धियां बताई, वहीं अपने सुझाव भी दिए. आईसीएआर-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) जोधपुर (राजस्थान), अटारी हैदराबाद (आंध्र प्रदेश), अटारी पटना (बिहार), अटारी जबलपुर (मध्य प्रदेश) के अलावा मंडी (हिमाचल प्रदेश), नंदूरबार (महाराष्ट्र), खुर्दा (ओडिशा), मोरीगांव (असम) और लक्षद्वीप के केवीके प्रमुखों ने अपने-अपने क्षेत्र विशेष के अनुसार अपने कामकाज, उपलब्धियों और भावी कार्य योजनाओं के बारे में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को जानकारी दी। वही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट और उप महानिदेशक (प्रसार) डॉ. राजबीर सिंह ने प्रारंभ में केवीके के संबंध में रूपरेखा बताई।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए अभियान स्वरूप कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कृषि व्यापक क्षेत्र है। वही प्रत्यक्ष रूप से लगभग 45 परसेंट आबादी कृषि से जुड़ी है और हमारी जीडीपी का लगभग 18 परसेंट हिस्सा कृषि क्षेत्र से ही आता है, इसलिए इस व्यापक भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए हमें लगातार प्रभावशाली प्रयास करने होंगे।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

केवीके प्रमुखों को संबोधित करते हुए उन्होंने किसानों के क्षमता निर्माण प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अच्छे प्रशिक्षण और जागरुकता के माध्यम से हम किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बना सकते हैं। इसके साथ ही शिवराज सिंह ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड और किसान जागरुकता को जोड़ते हुए कार्य करने की नई पहल करने संबंधी विचार भी साझा किए। किसानों को मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उवर्रक के संतुलित इस्तेमाल की मात्रा के अनुसार उचित एडवाइजरी देते हुए खेती करवाने की दिशा में आगे काम करने के लिए कहा।

 

Durg Rathor
Author: Durg Rathor

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