हरियाणा के पूर्व कृषि मंत्री करण सिंह दलाल ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 300 करोड़ रूपये से ज्यादा फसल बीमा घोटाले का आरोप लगाया है। उनका कहना है कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने एक निजी बीमा कम्पनी के साथ में मिलकर बड़े पैमाने पर घोटाला किया है। इस खबर से न केवल हरियाणा में बल्कि देश के अलग अलग इलाकों में हलचल मचा दी है इस प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को 18 फरवरी 2016 को पीएम मोदी के द्वारा लांच किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की उनकी उपज पर बीमा मुहैया कराना और उन्हें आर्थिक सुनिश्चित प्रदान करना है।
क्या पूर्व मंत्री की शिकायत
हरियाणा के राज्य पाल को दलाल की तरफ से शिकायत दर्ज कराई गयी है। इस शिकयत में दलाल ने कृषि विभाग की तरफ से सीनियर ऑफिसर और उनके सब-आर्डिनट पर भिवानी और चरखी दादरी जिलों में कपास की फसल के नुकसान में धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। इसके साथ उनका मानना है कि फसल के नुकसान में जो आकलन किया गया है वह पूरी तरह से धोखाधड़ी पर निर्भर है इसके साथ इसका निपटान करना अनिवार्य है।
गलत डाटा का हुआ इस्तेमाल
अधिकारियों ने फसल कटाई प्रयोग करने के बजाय तकनीकी उपज डेटा का प्रयोग किया गया है वह फसल कटाई प्रयोग यानी सीसीई पीएमएफबीवाई के तहत कपास जैसी गैर-धान और गैर-गेहूं फसलों का आकलन करने के लिए अनिवार्य तरीका है। दलाल का मानना है कि ‘तकनीकी उपज’ की मंजूरी सिर्फ गेहूं और धान के लिए है और तब भी सीसीई डेटा के साथ 70:30 के अनुपात में ही है।
विरोध को किया नजरअंदाज
भिवानी का कृषि उपनिदेशक ने कपास के लिए तकनीकी उपज के तरीके का विरोध किया है लेकिन उनकी आपत्ति को नजरंदाज कर दिया है। इसी तरह भिवानी की जिला स्तरीय निगरानी समिति ने बीमा कंपनी को पूरे किए गए सी.सी.ई. के आधार पर दावों का निपटान करने का निर्देश दिया था। इस निर्देश पर बीमा कंपनी ने कृषि निदेशक के पास जाकर विरोध जताया है। वही दलाल राजयपाल से मामले की उच्च स्तरीय जाँच करने के आदेश दिए। वही अधिकरियों और बीमा कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिए है।







