फ़ायरनिब/कालाअंब
Power Cut Problems: जिला की औद्योगिक नगरी कालाअम्ब में लगातार बिजली के अघोषित से कट लगाये जा रहें है. आलम ये है कि कट लगने की अवधि एक नहीं बल्कि 2 घंटे तक की है. जिसके चलते कालाअंब के उद्योगों में प्रोडक्शन कम हो रहा है, और उद्योगपतियों को प्रतिदिन लाखों रुपयें o चपत लग रही है. अघोषित कटो से उद्योपतियों में भारी रोष व्याप्त है। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में आए दिन बिजली के अद्योषित कट लग रहे है। जिससे जहां उद्योगों में मशीनों से तैयार हो रहा माल बीच में रुककर खराब हो रहा है। सहित वहीं कॉस्ट आफ प्रोडक्शन भी बढ़ रही है। लघु उद्योग भारती कालाअंब के अध्यक्ष संजय सिंगला उद्योगपति मुनीष सैनी,पवन सैनी,मनोज गर्ग,नितिन अग्रवाल इत्यादि दर्जनों उद्योगपति ने बताया कि कालाअंब में बिजली के अघोषित कटों का सिलसिला अब रोजाना बढता ही जा रहा है।

प्रतिदिन लोड कम करने का बहाना चला रहता है. पिछले 24 घंटे में जहां शाम को तीन से चार घंटे का बिजली का कट लगा। वहीं माह में एक बार शट डाउन भी नियमित लिया जा रहा है। बावजूद इसके बिजली की समस्याओं से छुटकारा नहीं मिल रहा हैं। नजीतन बिजली कटों से उद्योगों को नुकसान हो रहा है। उद्योगपतियों ने कहा है कि प्रदेश सरकार व प्रशासन को कालाअंब बिजली पावर स्टेशन को अपग्रेड करने की बार बार मांग की जा रही है। मगर यह मांग केवल फाइलों में दबकर रह गई हैं।

इस्पात उधोगों सहित फार्मा उधोय्गों को लग रही करोड़ों की चपत
जानकारी देते हुए काला अंब के दर्जनों इस्पात व फार्मा उद्योगों ने बताया कि घंटो बिजली गायब रहने से कम्पनी को माल बनाने के लिए जेनरेटर का इस्तेमाल कर्णम पड़ता है. जिसमे उन्हें बहुत ही ज्यादा खर्च आ रहा है. पेट्रोल महंगा होने के साथ-साथ की खपत भी अधिक आती है, जिसके चलते उन्हें दुगना घाटा झेलना पड़ रहा है.
जनरेटर के इस्तेमाल से पर्यावरण को नुकसान
कालाअंब के उद्योगपतियों का कहना है कि जेनरेटर के इस्तेमाल से वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है जिससे आस पास के स्थानीय लोगों को समस्या पेश आती है. वही प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड भी इस बाबत नोटिस थमा देता है. उनके लिए दोनों तरफ से मुसीबत बनी हुई है.

कालाअम्ब का विधुत सब स्टेशन का कार्य लटका अधर में
कालाअम्ब में लोड को सँभालने के लिए और उद्योगों को बिजली की अविलम्ब आपूर्ति देने के लिए पॉवर ग्रिड कारपोरेशन द्वारा 400 केवी का सब स्टेशन मीरपुर कोटला में जुलाई 2017 में तैयार कर दिया गया था, परन्तु इसकी प्रदेश बिजली द्वारा अभी तक बिजली की लाइन का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है. जबकि यह प्रोजेक्ट 201 तक पूर्ण किया जाना तय था. इसमें अब तक प्रदेश का बिजली बोर्ड 2017 से प्रति माह 5 करोड़ 22 हजर 663 रूपये का जुर्माना भर रहा है. इस प्रोजेक्ट में शामिल ज़मीं का मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में लंबित है जिसके कारण यह प्रोजेक्ट भी अधर में लटका हुआ है.

क्या कहते है उर्जा मंत्री ?
उधर, हिमाचल प्रदेश उर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने बताया कि कालाअंब में बरसात के कारण इस प्रकार की असुविधा पेश आ रही है. इसे दूर कर दिया गया है. साथ ही सब स्टेशन के कार्य में लाइने बिछाने का कार्य बाकी है, इसमें वन विभाग की तरफ से क्लीयरन्स मिल चुकी है, जिसको लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट के अधीन है. जल्द ही यहाँ के उद्योगपतियों की समस्या को दूर कर दिया जायेगा.
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