बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: यह तो आप सभी जानते हैं कि हमारे पूरे भारत में करीब 12 ज्योतिर्लिंग है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों की विशेषता और कहानियां अलग-अलग है। आज हम आपको 1 ज्योतिर्लिंग के बारे में कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं। आज हम जिस ज्योतिर्लिंग के बारे में बात करने जा रहे हैं उसका नाम है बैद्यनाथ धाम। इस धाम को शक्तिपीठ के नाम से भी बुलाया जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि बैद्यनाथ धाम को लेकर एक रहस्य आज भी बरकरार है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्त अपनी परेशानी और अपने मनोकामना लेकर इस मंदिर के शिवलिंग को हाथ लगाता है, वैसे ही वह अपनी सारी बातें भूल जाता है।
हमने आज तक शंकर भगवान के मंदिर में त्रिशूल देखा होगा, लेकिन बैद्यनाथ मंदिर में त्रिशूल की जगह पंचशूल रखा गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा गया है कि जब तक इस मंदिर में पंचशूल रखा गया है इस मंदिर का बाल भी बांका नहीं हो पाएगा, इस पंचशूल त्रिशूल को सुरक्षा कवच भी कह सकते हैं।

ऐसा माना जाता है कि यह पंचशूल त्रिशूल मानव शरीर के पांच विकार काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह के प्रतीक है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि बैद्यनाथ धाम में माता सती का ह्रदय आकर गिरा था। इसलिए ऐसा माना जाता है कि माता सती के ह्रदय में भगवान शंकर बसे हुए थे, इसलिए वह इस मंदिर में वास करते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर को हृदय पीठ मंदिर के नाम से भी बोला जाता है।

हमारे पौराणिक कथा में यह भी लिखा गया है कि रावण ने भगवान शिव को अपने साथ लंका ले जाने का वरदान मांगा था। लेकिन उस दौरान भगवान शिव ने कहा कि अगर तुमने कहीं पर भी मेरी शिवलिंग नीचे रख दी तो मैं वहीं पर विराजमान हो जाऊंगा। और आपको बता दें कि बैद्यनाथ धाम में ही रावण ने शिवलिंग को नीचे रख दिया था, तब से भगवान शिव यहीं पर विराजमान है।








20 Responses
Emerald Acosta
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