केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से पुरन्दर में चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे के लिए सैद्वांतिक मंजूरी दे दी गयी है हालांकि 20 हजार करोड़ रूपये की इस ग्रीनफील्ड परियोजना को स्थानीय स्तर पर काफी विरोध हो रहा है। 20 अप्रैल को एकनापुरम गांव में इस एयरपोर्ट के खिलाफ आंदोलन 1,000 हो जाएंगे। वही इस निर्णय की घोषणा करते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा कि इस परियोजना को महानगरीय केंद्रों में हवाई यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में तैयार किया है। हाल ही में नायडू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा की प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में दूसरे हवाई अड्डों के विकास के माध्यम से यात्रियों की बढ़ती हुई मांग को पूरा किया जा रहा है।
चेन्नई से 70 किलोमीटर दूर
चेन्नई से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर प्रस्तावित परंदूर हवाईअड्डे का उद्देश्य मौजूदा चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्री दबाव को कम करना है। तमिलनाडु सरकार ने कांचीपुरम और श्रीपेरंबदूर तालुकों के 13 गांवों में फैली 2,325 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहण के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी थी। एक अधिकारी के अनुसार केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ, तमिलनाडु औद्योगिक विकास निगम भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है।
करीब 1,822 करोड़ का मुआवजा
आपको बता दे, यह 3,774 एकड़ पट्टा वाली भूमि है जो 1,972 एकड़ सरकारी स्वामित्व वाली है। अधिकारियों का कहना है की मुवाजा पैकेज को ऊर्ध्वगामी रखा गया है वही पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता के अधिकार के तहत भूमि अधिग्रहण की बातचीत की गयी है वही मुआवजे की लागत की बात करे 1,549 करोड़ से 1,822 करोड़ के बीच होगी।
एयरपोर्ट का विरोध
हालाँकि, इस परियोजना से जुड़े समुदायों को काफी ज्यादा विरोध का सामना करना पड़ रहा है वही एक हजार से ज्यादा परिवारों को विस्थापित करने पर काम किया जा रहा है जिसमे एकनापुरम के 650 गांव है जो विरोध आंदोलन का केंन्द्र बना हुआ है जबकि सरकार ने अपनी पुनर्वास योजना के तहत 285 वर्ग फ़ीट के घरों की पेशकश की है, वही ग्रामीण अपने रुख पर अड़े हुए है।







