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देव दिवाली: जाने कब है देव दिवाली? जाने इसका शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व

देव दीपावली

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देव दिवाली: हमारे पंचांग तिथि के अनुसार हर साल के कार्तिक महीने की पूर्णिमा को देव दिवाली मनाई जाती है। इस दिन खासतौर पर वाराणसी नदी के पास गंगा नदी की पूजा पाठ करके नदी में दीप जलाए जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि ऐसा करने से भगवान शिव जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। साथ ही साथ में आपको माता गंगा का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस कार्तिक महीने की पूर्णिमा के दिन काशी के सभी मंदिर और घाट दीपों से जगमगाया उठते हैं। हमारे पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि सभी देवता गण काशी घाट पर आकर दीपदान करते हैं और भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। हम आपको बताते हैं दीप दिवाली मनाने का सही मुहूर्त और विधि।

देव दीपावली

देव दीपावली 2022:

हमारे हिंदू कैलेंडर और ज्योतिष ज्ञानियों के अनुसार कार्तिक महीने की पूर्णिमा इस बार 7 नवंबर 2022 सोमवार की शाम को 4:15 से शुरू होकर अगले दिन 8 नवंबर को 4:30 पर समाप्त हो जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देव दीपावली वाले दिन प्रदोष व्रत 7 नवंबर को ही समाप्त हो जाएगा।

देव दीपावली

देव दीपावली मुहूर्त 2022:

देव दीपावली का शुभ मुहूर्त 7 नवंबर को शाम को 5:17 पर शुरू होकर शाम के 7:49 पर समाप्त हो जाएगा। खास बात यह है कि इस साल देव दिवाली के लिए डेढ़ घंटे से ज्यादा का वक्त मिल रहा है।

देव दिवाली का धार्मिक महत्व:

हमारे धर्म ज्ञानी गुरुओं का ऐसा कहना है कि पौराणिक कथाओं में लिखा गया है कि त्रिपुरासुर नामक राक्षस के अत्याचार और अधर्म से पूरा विश्व परेशान चल रहा था। तब इस राक्षस से मुक्ति पाने के लिए सभी देवता गण ने भगवान शिव के शरण में जाना सही समझा। सभी देवता गण की बात सुन भगवान शिव ने देव कार्तिक महीने की पूर्णिमा को त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए सभी देवता गण प्रसन्ना होकर भगवान शिव के चरण के लिए काशी के धाम पहुंच गए थे। राक्षस का वध करने के बाद सभी देवता गण ने धाम में दीपदान किया था। इसीलिए कार्तिक महीने की पूर्णिमा को देव दिवाली कहा जाता है।

देव दीपावली

ऐसा कहा जाता है कि कार्तिक महीने की पूर्णिमा के दिन सभी देवता गण काशी धाम मे एकत्रित होकर दीपदान करते हैं। खास तौर पर 1 दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है।

Firenib
Author: Firenib

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