इस बार हरियाणा चुनाव में काफी अजीब सा कॉम्बिनेशन देखने को मिला है। जब कांग्रेस ने अपने इंडिया गठबंधन के सहयोगी सीपीएम के भिवानी की सीट को छोड़ने का फैसला किया है भिवानी का नाम किसी समय वाम आंदोलन से जुड़ा हुआ था। ऐसी बात नहीं है कि इस शहर में कोई विख्यात वामपंथी चेहरा है। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि आखिर यहाँ कौन वामपंथी है जिनके लिए कांग्रेस ने भिवानी की सीट छोड़ दी है। अब बस एक ही सवाल आपके जेहन में है।
कौन हैं भिवानी से ‘इंडिया’ के उम्मीदवार
आपको बता दे, भिवानी से इंडिया पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कॉमरेड ओमप्रकाश, बड़ी सहजता से स्वीकार किया गया है वह पहले एक बैंक ऑफिसर थे। उन्होंने 5 साल नौकरी में रहते हुए स्वेच्छा से रिटायरमेंट ले लिया और लग गए जनसेवा में। ओमप्रकाश का काम, निरक्षरों के लिए आवेदन लिखना शुरू किया। ओमप्रकश कोर्ट कचहरी की पेचीदा समस्याओं में आम लोगों का साथ देना और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए लोगों की मदद करना। ये कॉमरेड ओमप्रकाश की पहचान है। कॉमरेड ओमप्रकाश को इस तरह के कामों में अपनी जेब से भी खर्च करना पड़ता है। उन्होंने नियम बना रखा है। शहर में हर जगह पैदल आते जाते हैं और कोई अधिकारी लोगों के काम न करे तो समर्थकों को बुला कर उसके दफ्तर के बाहर धरना देते हैं। गांव-गांव जाकर सरकारी योजनाओं का लाभ आम आदमी तक पहुंचे, इसमें भी सामान्य लोगों की मदद करते हैं।
भिवानी में AAP का भी जलवा
इस बात हरियाणा में आम आदमी पार्टी ने 90 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए है भिवानी से इंदु शर्मा AAP की उम्मीदवार बनी है। इंदु शर्मा के ससुर पुराने कोंग्रेसी नेता थे और आम आदमी के पार्टी को लगता है कि भिवानी द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार नहीं दिए जाने से कट्टर कोंग्रेसियो के वोट उन्हें मिलेंगे। हरियाणा का हालु बाजार चुनावी सट्टे के लिए काफी लोकप्रिय है। यहां लोगों ने बताया कि उन्हें कांग्रेस का दांव समझ नहीं आया है कि आखिर पार्टी ने भिवानी की सीट क्यों छोड़ दी। हरियाणा में कांग्रेस की जमीन को मजबूत करने वाले बंसीलाल का ताल्लुक भिवानी से रहा है।
बीजेपी को वॉकओवर?
बीजेपी को लगता है कि कांग्रेस ने भिवानी सीट पर एक कॉमरेड का समर्थन करके बीजेपी को वॉकओवर दे दिया है। तीन बार से लगातार भिवानी सीट जीत रहे बीजेपी प्रत्याशी घनश्याम श्रॉफ कहते हैं, कॉमरेड ओमप्रकाश को तो शहर के चंद लोगों को छोड़ कोई जानता ही नहीं है। उस पर से सीपीएम का भिवानी में कभी कोई जनाधार रहा ही नहीं। लिहाजा लगातार चौथी बार बीजेपी की जीत का दावा करते हुए बीजेपी प्रत्याशी कहते हैं कि अब उनका मुक़ाबला सीपीएम-कांग्रेस उम्मीदवार से नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार से है।
हाल ही में ज्यादातर लोगो को लगता है कि भिवानी में बीजेपी की राह और भी ज्यादा आसान होती जा रही है जबकि भूत सारे लोगो का मानना है कि भिवानी में सीपीएम को सीट देकर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को मौका दे दिया है। लेकिन कुछ लोगो का कहना है कि कॉमरेड ओमप्रकाश भी जीत सकते हैं!







