कई दिनों के लम्बे इंतजार के बाद अब हरियाणा में चुनाव खत्म होने जा रहे है। पिछली शाम को मतदान थमने के बाद में एग्जिट पोल्स के नतीजे सामने आ रहे है वही सत्ताधारी दल के होश उड़ा कर रख दिए है वही सभी एग्जिट पोल्स में कांग्रेस को बहुमत मिलता दिख रहा है अगर एग्जिट पोल्स के रुझान सही साबित होते है तो पुरे एक दशक बाद कांग्रेस हरियाणा में कमबैक कर सकती है। इसके साथ ही जातीय समीकरण तक बीजेपी की हार के अनगिनत कारण मौजूद हैं। ऐसे में आइए जान लेते है हरियाणा में कांग्रेस के लिए चुनाव जितना क्यों ज्यादा जरुरी है।
उत्तर भारत में फिर से पकड़ मजबूत
कांग्रेस की जीत का इशारा हरियाणा की जनता ने लोकसभा चुनाव में पहले ही दे चुकी है। लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने बीजेपी को करारी टक्कर दी थी। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही 5-5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में अगर कांग्रेस हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतती है, तो हिमाचल प्रदेश के बाद हरियाणा उत्तर भारत का दूसरा अहम राज्य होगा, जिसकी कमान कांग्रेस के हाथों में रहेगी।
किसानों का मिलेगा समर्थन
कांग्रेस की हरियाणा में वापसी की एक बड़ी वजह किसानों का समर्थन भी है। हरियाणा एक कृषि प्रधान क्षेत्र है यहाँ पर किसानों की संख्या काफी ज्यादा है। किसानों की तरह कांग्रेस ने भी कृषि कानूनों पर आपत्ति जताई है। ऐसे में जाहिर सी बात है कांग्रेस किसानों का पूरा साथ देगी वही शंभू बॉर्डर पर किसानों की मौजूदगी केंद्र सरकार की टेंशन बढ़ा सकती है।
कांग्रेस को मिला दलितों का साथ
कांग्रेस की जीत में जाट और दलितों का बड़ा हाथ रहेगा। हरियाणा में जाट आबादी काफी ज्यादा है वही दलित आबादी भी 20 % के आसपास है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा जाट समुदाय से आते हैं, तो वहीं हरियाणा चुनाव में सुर्खियां बटोरने वाली कुमारी सैलजा दलित समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। कुमारी सैलजा का नाम सीएम की रेस भी सामने आ रहा है।







