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Himachal News: ब्रेन टयूमर के लिए न्यूरो नेवीगेशन एक वरदान की तरह

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Himachal News: ब्रेन टयूमर की सर्जरी को लेकर पीडि़त व्यक्ति से ज्यादा परिजनों में कई तरह की चिंता रहती है, क्योंकि पहले दिमाग से संबंधित सर्जरी काफी काम्पिलकेशन (पेचीदा) होती थी, जो कि मरीजों के लिए बेहद नुकसानदायक भी रही,

परंतु अब समय के साथ आई नई तकनीकों से ब्रेन टयूमर की सटीक लोकेशन का डाक्टर सरलता से पता लगा सकते हैं

बुजुर्ग व्यक्ति के दिमाग से गोल्फ बॉल जितने ब्रेन टयूमर को निकालकर उन्हें नया जीवनदान दिया

साथ ही उसे दिमाग के अन्य हिस्से को नुकसान पहुंचाए बिना हटा भी सकते हैं। यह बात जाने माने न्यूरो स्पाइन सर्जन डा. हरसिमरत बीर सिंह सोढी ने आज मंडी में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कही, जिनके द्वारा हाल ही न्यूरो नेवीगेशन तकनीक से मंडी के एक बुजुर्ग व्यक्ति के दिमाग से गोल्फ बॉल जितने ब्रेन टयूमर को निकालकर उन्हें नया जीवनदान दिया गया है।फोर्टिस अस्पताल मोहाली में न्यूरो स्पाइन सर्जरी के सीनियर कंस्लटेंट डॉ. हरसिमरत बीर सिंह सोढ़ी ने बताया कि वो वक्त चला गया, जब ब्रेन टयूमर के बारे पता चलते ही मरीज सहित पूरा परिवार निराश हो जाता था, क्योंकि उन्हें डर रहता था मरीज का पूरा सिर खोलकर सर्जरी होगी।

तकनीकी क्रांति से अब गंभीर से गंभीर ब्रेन टयूमर को दिमाग से निकाला जा सकता है

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के मामलों में ब्रेन टयूमर का मामला ज्यादा पेचीदा रहता था। उन्होंने कहा कि ब्रेन टयूमर के इलाज में आई तकनीकी क्रांति से अब गंभीर से गंभीर ब्रेन टयूमर को दिमाग से निकाला जा सकता है।उन्होंने बताया कि न्यूरो नेवीगेशन तकनीक से हाल ही में 83 वर्षीय बुजुर्ग के दिमाग से गोल्फ बॉल आकार के ब्रेन टयूमर को निकालने में सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि उक्त बुजुर्ग मरीज पिछले 15 दिनों से शरीर के निचले अंगों में सुन्नता के कारण चलने फिरने में असमर्थ, मूत्र असंयम तथा देखने व सुनने की घटती क्षमता के चलते चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा था। जांच करने पर उनके दिमाग में एक गोल्फ बाल के आकार का टयूमर दिखा, जो कि मस्तिष्क में नसों को नुकसान पहुंचा रहा था।

न्यूरो नेविगेशन की मदद से माइक्रो सर्जरी के जरिए टयूमर को हटा दिया गया

डा. सोढ़ी ने बताया कि उक्त टयूमर मरीज के मूत्र प्रणाली और बाएं हाथ-पैर को नियंत्रित करने वाली नसों को बाधित कर रहा था, जिस कारण इलाज में देरी से मरीज अपनी आंखों की रोशनी खो सकता था। उन्होंने बताया कि न्यूरो नेविगेशन की मदद से माइक्रो सर्जरी के जरिए टयूमर को हटा दिया गया। उन्होंने बताया कि अच्छी देखभाल उपरांत मरीज को छुट्टी दे दी गई तथा अब वह सामान्य जीवन जी रहे हैं।मामले पर चर्चा करते हुए डॉ सोढ़ी ने कहा कि हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती मरीज की उम्र थी क्योंकि वह 83 साल का था। बुजुर्ग मरीजों को दिमाग की बड़ी सर्जरी से ठीक होने में काफी समय लगता है। उक्त मरीज के इलाज में सबसे अहम उसकी बाएं हाथ-पैर को कंट्रोल करने वाली नसों को नुकसान से बचाने व उसके मूत्र प्रवाह की बहाली अहम थी।

न्यूरो नेवीगेशन से न्यूरो सर्जरी में गलती की बिल्कुल भी गुजाइंश नहीं रहती

उन्होंने बताया कि आप्रेशन के समय कई बार रक्त का थक्का (कलॉट) बन जाता है, जिस कारण मरीज लंबे समय तक आईसीयू में रहना पड़ता है। उन्होंने बताया कि न्यूरो नेवीगेशन से न्यूरो सर्जरी में गलती की बिल्कुल भी गुजाइंश नहीं रहती, क्योंकि नेवीगेशन सिस्टम से टयूमर की सही लोकेशन तथा टयूमर को दिमाग के किस सही रास्ते से बाहर निकालना है, तथा दिमाग की किसी अन्य नस को वहां से नुकसान नहीं पहुंचा रहा है आदि सभी महत्वपूर्ण जानकारी का पता रहता है। इससे ऑपरेशन का परिणाम काफी बेहतर हो जाता है और गलती की संभावना न के बराबर रह जाती है।

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Author: Firenib

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