हिमाचल प्रदेश से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है जिसके मुताबिक बारिश और भूस्खलन के चलते मणिमहेश यात्रा पर गए श्रद्धालुओं को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आपको बता दें रविवार से लगातार बारिश जारी है और इसी के साथ कई जगहों पर भूस्खलन भी देखने को मिला जिसके चलते हजारों यात्री भरमौर में फंसे हुए हैं और अपने घरों के लिए निकलने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। मंगलवार को लगातार बारिश के चलते हालात और भी ज्यादा बिगड़ गए हैं जिसके चलते प्रशासन द्वारा यात्रियों को सुरक्षित निकलने की चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें NDRF, SDRF, के साथ पुलिस और होमगार्ड के 500 से अधिक जवान भी फंसे हुए हैं। रास्ता बाधित होने के कारण लंगर समितियों से जुड़े लोगों और विभागीय टीमों का भी आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक मंगलवार को मौसम खराब होने के चलते भरमौर हेलीपेड से कोई भी उड़ान नहीं हो पाने के कारण यात्रियों को निकलना संभव नहीं हो सका। मार्ग में फंसे तीन शवों को सुरक्षित चंबा मेडिकल कॉलेज पंहुचना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

मंत्री जगत सिंह नेगी ने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का किया निरीक्षण
प्रशासन लगातार मलबा हटाने की कोशिश में लगा हुआ है लेकिन लगातार हो रही बारिश के चलते कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार मलबा गिरने के चलते सड़क बहाली के कार्य में बाधा आ रही है। प्रशासन 24 घंटे मशीनों की सहायता से रास्ता खोलने में लगा हुआ है लेकिन मौसम का सहयोग नहीं मिल रहा। जानकारी के मुताबिक सोमवार रात को कलसुई के पास लंगर में फंसे मणिमहेश सेवादल भराड़ी के 14 लोगों को बिलासपुर के भराड़ी के लिए रवाना किया गया है। बुधवार को मौसम साफ रहा तो फंसे हुए मणिमहेश यात्रियों को निकले जाने की उम्मीद है। मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा भरमौर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया गया।
लगातार हो रही बारिश के चलते उप तहसील तेलका के कई गांवों में लोगों की नींद उड़ी हुई है। जानकारी के मुताबिक कई घरों की दीवारों और छतों में दरारें पड़ गई हैं और मकान का ढांचा कमजोर हो गया है। इसके चलते सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। लगातार बारिश के चलते भूस्खलन और दीवार या छत गिरने की शंका बनी हुई है।







