भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों के अनुसार पर्यावरण और किसानों को ध्यान में रखते हुए क्रांतिकारी पहल की शुरुआत की गयी है। ICAR का यह प्रोजेक्ट जल्द ही इंडिया की सड़को पर बायोफ्यूल से चलने वाली कारों का सफर शुरू करने जा रहे है। इस बयोफ्यूल को मुख्य रूप से किसानों के द्वारा जलाई गयी पराली के द्वारा तैयार किया जाएगा। जिससे पर्यावरण को काफी फायदा होगा इसके साथ ही किसानों को आर्थिक रूप से काफी फायदा होगा।
इस प्रोजेक्ट की खासयित यह है कि यह पराली जलाने की समस्या का समाधान करती है वही दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए किसानों को अब पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी इसके बदले उन्हें कार्बन क्रेडिट्स के रूप में आर्थिक लाभ होगा। यह पहल किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। वही उन्हें न केवल पराली का उपयोग मिलेगा बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी भागीदार बनेंगे।
इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट से जो आटोमोबाइल कंपनियां जुड़ी हुई है उन्हें भी कार्बन क्रेडिट का लाभ मिलेगा जो उनकी स्टेनेबिलिटी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को बढ़ाएगा। कृषि क्षेत्र में इसका विशेष लाभ यह होगा कि पराली को फर्मेंट करने के बाद जो मेटेरियल वेस्ट नहीं होगा। इससे किसान अपने खेतो में जैविक खाद के रूप में भी बना सकते है इससे उत्पादकता और मिट्टी दोनों में काफी सुधार होगा।
ICAR बायोफ्यूल प्रोजेक्ट में CNG गैस के स्थान पर बायोफ्यूल का उपयोग किया जाएगा, जिससे न केवल किसानों को लाभ होगा बल्कि हमारे पर्यावरण में भी सुधार होगा। बायोफ्यूल का यह प्राकृतिक स्रोत कम लागत में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
इस प्रोजेक्ट का अनुमानित बजट लगभग 50 करोड़ रुपये की लगात आई है और यह परियोजना पूरी होने के बाद विश्व की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों को आकर्षित करने जा रही है। ICAR के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से भारत में बायोफ्यूल के क्षेत्र में नई क्रांति आएगी, और वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत अपनी पहचान बना पाएगा।
आपको बता दे, ICAR के वैज्ञानिकों का यह प्रोजेक्ट भारतीय किसानों, पर्यावरण और उद्योग के लिए एक स्वच्छ, सस्टेनेबल और लाभकारी समाधान साबित होगा।







