Success Story : तरुण और वरुण ने सबके लिए की मिसाल पेश, पराली को जलाकर बना ली ईंट

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Success Story : दिल्ली और आसपास के राज्य में पराली एक बहुत बड़ी समस्या बन कर किसानों के सामने आ चुकी है. किसानों को अगली फसल की तैयारी करने से पहले अपने खेतों को जल्द से जल्द साफ करना होगा. इसलिए मजबूर होकर किसान अपने खेत की पराली को जला देते हैं. इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है.

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लेकिन इस समस्या का समाधान निकालने के लिए दो भाइयों तरुण जामी और वरुण जामी ने पराली से ईट बनाने का काम शुरू कर दिया. इससे पर्यावरण को भी कम नुकसान हुआ और किसानों को भी फायदा मिला है.

Success Story : ऐसे आया पराली से ईट बनाने का आईडिया

वरुण जामी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उनकी कंपनी एग्रोक्रीट के को फाउंडर और उनके बड़े भाई तरुण जलवायु परिवर्तन को लेकर काफी परेशान थे. सन 2014 में इन्होंने इस समस्या पर योगदान जलवायु परिवर्तन में बिल्डिंग निर्माण कार्य का है.

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रिसर्च के दौरान उन्हें पता चला कि फ्रांस के अंदर भांग से ईट बनाई जाती है जो बिल्डिंग निर्माण में काम में ली जाती हैं. इसके बाद उन्होंने यह तकनीक भारत में भी लाने के बारे में सोचा. साल 2019 में इसे अमल में लाया गया. 2019 में जब वह एक इवेंट में पार्टिसिपेट करने दिल्ली आए तो उन्हें बहुत ज्यादा प्रदूषण दिखाई दिया. वह अस्थमा के मरीज भी है तो उन्हें काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा.

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इस प्रदूषण के पीछे का कारण था दिल्ली और पड़ोसी राज्य द्वारा जलाई जा रही पराली. दिल्ली और पड़ोस के राज्य में किसानों द्वारा पराली जलाई जा रही थी जिससे दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ रहा था. तो उनके दिमाग में विचार आया कि अगर भांग से ईंट बनाई जा सकती है तो पराली से भी यह काम किया जा सकता है. जिससे किसानों की समस्या भी खत्म हो जाएगी और पर्यावरण भी अच्छा रहेगा. इसके साथ ही लोगों को रोजगार भी मिल जाएगा.

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Success Story : एग्रोक्रीट की खास ईंट

पराली से बनाई गई ईट बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है. पराली से बनाई गई ईटों से घर बनाया जाता है तो वह सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है. इसके साथ ही इसके निर्माण कार्य में 50% की कम लागत आती है. चिनाई का काम भी 100% तेजी से होता है और 350% उच्च थर्मल इंसुलेशन है. इसके साथ ही पारंपरिक मिट्टी और फ्लाई ऐश ईंटो की तरह मजबूत भी होती हैं.

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Author: Firenib

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