Himachal News: अंतराष्ट्रीय मज़दूर दिवस का ज़िला स्तरीय कार्यक्रम सीटू ने आज मंडी में आयोजित किया गया।इस अवसर पर मंडी शहर में रैली निकाली गई और सेरी मंच पर जनसभा आयोजित की गई।जिसे सीटू के ज़िला प्रधान भूपेंद्र सिंह, महासचिव राजेश शर्मा,मिड डे मील के राज्य प्रधान इंद्र सिंह, रेहड़ी यूनियन के प्रधान सुरेंद्र कुमार, मनरेगा व निर्माण फेडरेशन के गुरुदास वर्मा और गोपेन्द्र शर्मा एचपीएमआरए के प्रधान एस पी राणा और सह सचिव गौतम ठाकुर जनवादी महिला समिति की जयवंती ने संबोधित किया।

भूपेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि शिकागो के शहीदों जिनकी याद में 1मई को मज़दूर दिवस के रूप में मनाया जाता है.
स्थायी रोज़गार के स्थान पर अस्थाई, पार्ट टाइम और अब फिक्स्ड टर्म का रोज़गार देने की नीतियां लागू की जा रही हैं
उन्होंने एक दिन में आठ घंटे के काम आठ घंटे आराम और आठ घंटे मनोरंजन के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी थी और जीती थी।लेकिन आज 133 साल पहले 1886में मई दिवस मनाने की शरुआत के बाद दुनियां में पूंजीपतियों व कम्पनियों द्धारा मज़दूरों व कर्मचारियों से 12-12 घण्टे काम करवाया जा रहा है।स्थायी रोज़गार के स्थान पर अस्थाई, पार्ट टाइम और अब फिक्स्ड टर्म का रोज़गार देने की नीतियां लागू की जा रही हैं।केंद्र की मोदी सरकार आज़ादी से पहले और बाद में बने 44 श्रम कानूनों में पूंजीपतियों के पक्ष में बदलाव कर रही है।
सीटू से सबंधित सभी यूनियनों ने श्रम कानूनों में किये गए बदलावों को रद्द करने की मांग उठाई
सीटू से सबंधित सभी यूनियनों ने श्रम कानूनों में किये गए बदलावों को रद्द करने की मांग उठाई। सीटू नेताओं ने इस अवसर पर कहा कि देश की आज़ादी के बाद विकसित किए गए सार्वजनिक क्षेत्र को मोदी सरकार द्धारा पूंजीपतियों को कौड़ीयोंके भाव बेचा जा रहा है। इसलिये वर्तमान समय में मई दिवस का महत्व और भी ज़्यादा बढ़ गया है और मजदूरों को पूंजीपतियों की बढ़ती लूट और मज़दूरों के शोषण के ख़िलाफ़ एकजुटता बढ़ानी होगी।केंद्र सरकार बढ़ती महंगाई के अनुसार वेतन नहीं बढ़ा रही है। 40 लाख के आसपास आंगनवाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्करों को न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है और न ही उन्हें मज़दूर या कर्मचारी घोषित किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में सरकार 40 हज़ार आउटसोर्स मज़दूरों व कर्मचारियों के लिए कोई नीति नहीं बना पा रही
हिमाचल प्रदेश में सरकार 40 हज़ार आउटसोर्स मज़दूरों व कर्मचारियों के लिए कोई नीति नहीं बना पा रही है।प्रदेश सरकार ने अब पार्ट टाइम वर्कर भर्ती करने का नया तरीका अपनाया है जिन्हें डेढ़-दो सौ रुपये दिहाड़ी दी जाती है।मनरेगा मज़दूरों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और उन्हें 240 रु दिए जाते हैं जबकि अन्य दिहड़ीदारों को 375 रु दिए जाते हैं।सीटू की मांग है कि वर्त्तमान में 700 रु दिहाड़ी मजदूरों को मिललनी चाहिए।केंद्र की भाजपा सरकार धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम कर रही है।
स्कूलों कॉलजों में पढ़ाने वाले इतिहास और अन्य पाठ्यक्रम को कट्टरपंथी हिन्दू विचारधारा के अनुसार बताया जा रहा
वहीं स्कूलों कॉलजों में पढ़ाने वाले इतिहास और अन्य पाठ्यक्रम को कट्टरपंथी हिन्दू विचारधारा के अनुसार बताया जा रहा है।यही नहीं विज्ञान को भी अलग तरीके से पेश किया जा रहा है।इसलिये मज़दूरों औऱ किसानों ने गत 5 अप्रैल को दिल्ली में आयोजित रैली में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में मोदी को सत्ता से बाहर करने का आह्वान किया है और आज के इस मई दिवस पर भी यही नारा बुलंद किया जा रहा है और उसके लिए आज से ही अभियान शुरू किया जा रहा है जो साल भर चलेगा।
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